About Homoeopathy
  होम्योपैथी विभाग, उत्तर प्रदेश Back
होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति के माध्यम से प्रदेश के जन-जन तक स्वास्थ्य सुविधायें उपलब्ध कराना प्रदेश सरकार के संकल्पों में से एक है। इस उद्देश्य की प्राप्ति हेतु होम्योपैथिक निदेशालय वर्ष 1981 से एक स्वतंत्र विभाग के रूप में कार्यरत है। होम्योपैथिक चिकित्सा विधा ''सम: समे समयति'' के मूल सिद्धान्त के आधार पर रोगियों को रोगमुक्त करने में सहयोग देती है। प्रदेश की जनता को बेहतर, सस्ती, रोगों को समूल नष्ट करने वाली त्वरित प्रभावकारी एवं स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न डालनें वाली चिकित्सा पद्धति होने के कारण आम जनता विशेष कर ग्रामीण जनता जिनमें अधिकतर गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली जनता जिसकी व्यय बहन क्षमता अत्यन्त न्यून है में बेहद उपयोगी होनें के फलस्वरूप इसकी लोकप्रियता में निर्वाध रूप से उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है तथा जन मानस में तीव्र गति से ग्राह्रय हो रही है।
विगत उपलब्धियाँ एवं वर्तमान स्तर:-

होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति के कार्यकलापों एवं गतिविधियों के संक्षणत: निम्न तीन आयाम है:-

1. होम्योपैथिक निदेशालय।
2. होम्योपैथिक चिकित्सा सेवा।
3. होम्योपैथिक चिकित्सा शिक्षा।

  1. होम्योपैथिक निदेशालय-
    विभागीय कार्यों के निर्देशन-पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण हेतु निदेशालय स्तर पर
    01 निदेशक, 01 मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी/वित्त नियंत्रक, 02 संयुक्त निदेशक, 02 उपनिदेशक तथा 22 तृतीय श्रेणी व 08 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद स्वीकृत है।

  2. होम्योपैथिक चिकित्सा सेवा-
    वर्ष
    1981 में पृथक होम्योपैथी विभाग की स्थापना के समय विद्यमान मात्र 329 राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालयों के सापेक्ष वर्तमान में यह संख्या 1515 है। उक्त चिकित्सालयों में 121 चिकित्सालय शहरी क्षेत्रों में तथा शेष 1394 चिकित्सालय सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित है।
    वर्ष
    2007-08में टी0एस0पी0 क्षेत्र में 01 शहरी/नगरीय क्षेत्रों में 32 चिकित्सालयों की स्वीकृति जारी की जा चुकी है। इस प्रकार इन चिकित्सालयों की कुल संख्या-1515 हो गयी है। उक्त के अतिरिक्त वर्ष 2007-08 में ग्रामीण क्षेत्रों में 60 तथा एस0सी0पी0 क्षेत्रों में 59 चिकित्सालयों की स्वीकृति जारी किये जाने की कार्यवाही गतिमान है। अत: विभाग द्वारा ग्रामीण जनता को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करानें का हर सम्भव सफल प्रयास किया जा रहा है। परिणाम स्वरूप इसकी लोकप्रियता में निर्वाध रूप से उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है तथा जन मानस में तीव्र गति से ग्राह्रय हो रही है। इस तथ्य की पुष्टि इससे होती है कि वर्ष 1983-84  में इस पद्धति द्वारा सेवित रोगियों की संख्या मात्र 18.20 लाख थी जो वर्षानुवर्ष उत्तरोत्तर वृद्धि के साथ वित्तीय वर्ष 2006-07 के अन्त में 182.71 लाख हो चुकी है, जो लगभग 10 गुना वृद्धि को अंकित करता है। विगत पाँच वर्षों में होम्योपैथिक विधा द्वारा सेवित रोगियों की संख्या का विवरण निम्न तालिका के अनुसार है:-

वर्ष सेवित रोगियों की संख्या
2002-03 142.46 लाख
2003-04 154.21 लाख
2004-05 178.24 लाख
2005-06 172.95 लाख
2006-07 182.71 लाख
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दसवीं पंचवर्षीय योजना काल में विभिन्न वर्षों में भौतिक लक्ष्य/उपलब्धियाँ
वर्ष लक्ष्य
(चिकित्सालयों की स्थापना)
उपलब्धियाँ
2003-04 236 0
2004-05 134 0
2005-06 217 141 चिकित्सालय
2006-07 313 -
2007-08 152 93 चिकित्सालय

होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति के अन्तर्गत रोगों की विधिवत जानकारी, गहन परीक्षण एवं होम्योपैथिक औषधियों के चयन में रिपटरी की सहायता ली जाती है। इस हेतु प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों, सभी राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों से सम्बद्ध चिकित्सालयों को कम्प्यूटरीकृत किया जा चुका है।

प्रदेश के सभी मुख्यालयों पर जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारीगण तैनात है, उनके कार्यालयों को भी कम्प्यूटरीकृत किया जा चुका है।

जिला योजना के अन्तर्गत वर्ष 2004-05 में 06 राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालयों तथा वित्तीय वर्ष 2005-06 में 92 राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालयों के भवन निर्माण हेतु क्रमश: रू० 17.10 लाख तथा रू० 262.20 लाख की धनराशि स्वीकृति हुई। निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2006-07 में 25 चिकित्सालयों के भवन निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गयी है। वित्तीय वर्ष 2007-08 में भी 135 चिकित्सालयों का भवन निर्माण कराये जाने का प्रस्ताव है। वर्ष 2008-09 में भी अधूरे/अपूर्ण कार्यों को पूर्ण कराये जाने हेतु आवश्यक धनराशि की व्यवस्था कराये जाने का प्रस्ताव है।

वित्तीय वर्ष 2007-08 में आयोजनेत्तर पक्ष में प्राविधानित रू० 10980.56 लाख के सापेक्ष माह दिसम्बर, 2007 तक रू० 5870.36 लाख का व्यय किया जा चुका है तथा आयोजनागत पक्ष में चालू नियोजन विभाग द्वारा 23.66 करोड़ रूपये का परिव्यय होम्योपैथी विभाग के लिए आवंटित किया है जिसके अन्तर्गत 153 चिकित्सालयों की स्थापना 135 चिकित्सालय भवनों का निर्माण, 02 नये होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों की स्थापना, होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों का सुदृढ़ीकरण, होम्योपैथिक निदेशालय का 'सुदृढ़ीकरण, जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी कार्यालयों की स्थापना एवं भवन निर्माण, 18 महिला चिकित्साधिकारियों के पदों का सृजन, औषधि निर्माणशाला/परीक्षणशाला की स्थापना, 126 पद विहीन चिकित्सालयों में पदों का सृजन आदि के सम्बन्ध में उक्त धनराशि के अन्तर्गत प्रस्तावों के सापेक्ष वित्त विभाग द्वारा आय-वययक में रू० 25.09 करोड़ की धनराशि प्राविधानित की गयी है जिसमें राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों हेतु भारत सरकार से प्राप्त अनुदान भी सम्मिलित है। जिसके सापेक्ष शहरी क्षेत्र में 32, सामान्य/ग्रामीण क्षेत्र में 60 तथा टी0एस0पी0 क्षेत्रों में एक कुल 93 राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय की स्थापना हेतु 01-01 चिकित्साधिकारी, 01-01 भेषजिक तथा संविदा के आधार पर चतुर्थ श्रेणी के पदों का सृजन तथा महिला चिकित्साधिकारियों के 18 पदों की शासकीय स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है एवं राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों में शोध सम्बन्धी कार्यक्रमों हेतु रू० 280.00 लाख की शासकीय/वित्तीय स्वीकृति निर्गत की जा चुकी है।

  1. होम्योपैथिक चिकित्सा शिक्षा-
    वर्तमान में प्रदेश में कुल
    07 होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय जो लखनऊ, इलाहाबाद, कानपुर, फैजाबाद, गाजीपुर, आजमगढ़ एवं मुरादाबाद जनपदों में स्थापित/कार्यरत है। इन सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में बी0एच0एम0एस0 डिग्री पाठ्यक्रम संचालित है जिसमें कुल प्रवेश क्षमता 300 छात्र प्रति वर्ष है। प्रथम वर्ष में प्रवेश सी0पी0एम0टी0 मेरिट के आधार पर किया जाता है। उक्त सभी कालेज डा0 भीम राव अम्बेडकर विश्व विद्यालय, आगरा से सम्बद्ध है।
    इन सभी रा0हो0मे0का0 में केन्द्रीय होम्योपैथिक, नई दिल्ली के मानको के अनुसार शिक्षण/शिक्षणेत्तर पदो की कमी को दृष्टिगत रखते हुए ही शासनादेश संख्या-
    116/71-4-2007-26(बी)/06, दिनांक 25 मई, 2007 द्वारा केन्द्रीय होम्योपैथिक परिषद, नई दिल्ली के मानकानुसार प्रदेश के 07 राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कालेज एवं अस्पताल में 194 शैक्षणिक पदों (जिसमें राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कालेज लखनऊ, कानुपर, इलाहाबाद में परास्नातक कोर्स प्रारम्भ किये जाने हेतु आवश्यक 09 प्रोफेसर कुल 18 पद भी सम्मिलित हैं) तथा 404 शिक्षणेत्तर पदों का सृजन किया गया है।

    दसवीं पंचवर्षीय योजनाकाल में प्रवेश में निर्माणाधीन तीन राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों तथा लखनऊ, कानपुर तथा इलाहाबाद के भवनों के निर्माण हेतु कुल स्वीकृत लागत रू० 4843.48 लाख के सापेक्ष वर्षानुवर्ष चालू वित्तीय वर्ष 2006-07 के आय-व्ययक में व्यवस्थित धनराशि को सम्मिलित करते हुए अब तक 4379.54 लाख की स्वीकृति जारी की जा चुकी है। चालू वित्तीय वर्ष 2007-08 में भी अवशेष धनराशि रू० 463.94 लाख आय-व्ययक में व्यवस्था है, जिसे जारी किये जाने की कार्यवाही गतिमान है। आगामी वित्तीय वर्ष 2008-09 आगणन पुनरीक्षित हो जाने के कारण पुनरीक्षित लागत के अनुसार अर्न्तनिहीत धनराशि के समतुल्य रू० 501.38 लाख प्रस्तावित है। निजी क्षेत्रों में स्थापित/संचालित होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों की स्थिति निम्नवत् है:-

1. वैकसन होम्योपैथिक मेडिकल कालेज, नोएडा, गौतम बुद्ध नगर, उ0प्र0।

  1. प्रवेश क्षमता- 100 छात्र प्रतिवर्ष 50 प्रतिशत सामान्य, 50 प्रतिशत अल्प संख्यक।

  2. प्रवेश का आधार- मैरिट के आधार पर।

  3. निर्धारित फीस- रू० 35000/- प्रति छात्र
                       रू०
    5000/- विश्वविद्यालय चार्जेज
                       रू०
    5000/- सिक्यूरिटी मनी
                       (पाठ्यक्रम पूर्ण होने पर वापसी)

2. सांईनाथ पोस्ट ग्रेज्यूऐट इन्स्टीट्यूट इलाहाबाद (होम्योपैथिक)

  1. प्रवेश क्षमता- 8 विषयों (आर्गेनान आफ मेडि‍सिन होम्यो० मेटेरिया, मे‍डिका, रीपर्टरी, मिडियाट्रिक्स, प्रैक्टिस आफ मेडिसिन साइकेट्रिक) प्रत्येक में 6 छात्र प्रतिवर्ष कुल 36 छात्र प्रतिवर्ष (नियमित छात्र) उक्त के अतिरिक्त तीन विषयों आर्गेनान आफ मेडिसिन होम्यो० मेटेरिया, मेडिका, रीपर्टरी) प्रत्येक में 9 वाह्रय अभ्यर्थियों को मेरिट के आधार पर प्रवेश दिया जाता है।

  2. निर्धारित फीस- रू० 41000/- प्रतिवर्ष प्रति छात्र।

उद्देश्य :-

  1. होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति के माध्यम से प्रवेश के जन-जन तक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना।

  2. गुणवत्तापरक होम्योपैथिक औषधियों उपलब्ध कराया जाना।

  3. होम्योपैथिक कालेजों में अपेक्षित अवस्थापना सुविधायें उपलब्ध कराते हुए शोध एवं अनुसंधान को प्रोतसाहन देना।

  4. गम्भीर व सांक्रमक रोगों के प्रति जागरूकता बचाव एवं चिकित्सा उपचार।

  5. शिशु मृत्युदर एवं मातृ मृत्युदर को होम्योपैथिक चिकित्सा के माध्यम से कम करना।

  6. स्कूली बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण के माध्यम से बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल करना।

  7. जन साधारण विशेषकर निर्धन वर्ग व संवेदनशील वर्ग को गुणवत्ता कारक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना।

  8. राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के उद्देश्यों की पूर्ति।

  9. अनुसूचित जाति/जनजाति क्षेत्रों में पर्याप्त होम्योपैथिक चिकित्सा सुविधा प्रदान करना।

आवश्यकता एवं पूर्ति के सम्बन्ध में रणनीति :-

  1. सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाये जाने के उद्देश्य से होम्योपैथिक विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण जिसके अन्तर्गत मण्डलीय अधिकारियों तथा उनके कार्यालय की स्थापना, जनपद स्तर पर जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारियों के कर्यालयों की स्थापना, सचल चिकित्सालय की स्थापना के साथ ही मण्डलीय तथा जनपद स्तर के अधिकारियों को वाहन उपलब्ध कराया जाना।

  2. प्रदेश की वर्तमान आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए राजकीय तथा निजी क्षेत्र में नये होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों की स्थापना।

  3. राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों के प्राचार्यों/अधिकारियों को वाहन तथा चिकित्सालयों हेतु एम्बुलेन्स उपलब्ध कराया जाना।

  4. केन्द्रीय होम्योपैथी परिषद् नई दिल्ली के मानकों के अनुरूप वर्तमान होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों का सुदृढ़ीकरण तथा अति आवश्यक पदों का सृजन।

  5. होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति में शिक्षा के स्तर में उन्नयन हेतु प्रदेश में स्थापित 07 राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों जिनमें केवल स्नातक पाठ्यक्रम ही संचालित है, में परास्नातक विशेषज्ञता पाठ्यक्रम प्रारम्भ/संचालित किया जाना।

  6. शोध एवं अनुसंधान को अधिकाधिक गतिशीलता प्रदान किये जाने के उद्देश्य से होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों में शोध एव अनुसंधान शाखाए स्थापित करना।

  7. होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों की व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने हेतु पृथक से होम्योपैथिक विश्व विद्यालय की स्थापना किया जाना।

  8.  सुदूर एवं दुर्गम क्षेत्रों तथा वह क्षेत्र जहाँ प्रभावी चिकित्सकीय सेवायें उपलब्ध नहीं हैं, में 1000 नये राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालयों की स्थापना।

  9. भवन रहित अथवा किराये पर चल रहे राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालयों में से प्रथम चरण में 600 चिकित्सालयों का भवन निर्माण।

  10. निजी क्षेत्र की सहभागिता के माध्यम से होम्योपैथिक चिकित्सा सेवा/चिकित्सा शिक्षा की सेवाओं को जन सामान्य तक पहुँचाना।

  11. 126 पदविहीन चिकित्सालयों में पदों का सृजन।

प्राथमिकतायें:-

  1. केन्द्रीय होम्योपैथी परिषद्, नई दिल्ली द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानकों के अनुरूप स्नातक एवं परास्नातक स्तर पर होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों में अति आवश्यक पदों का सृजन।

  2. जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी कार्यालय की स्थापना के फलस्वरूप लिपिक वर्गीय तथा चतुर्थ श्रेणी पदों का सृजन व कार्यालय भवन का निर्माण।

  3. केन्द्रीय होम्योपैथी परिषद के मानकों के अनुरूप शेष 04 होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों के भवनों का निर्माण।

  4. 10 नये होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों की स्थापना।

  5. वर्तमान होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों का उच्चीकरण तथा शोध सम्बन्धी कार्यक्रमों का संचालन।

  6. होम्योपैथिक विश्व विद्यालय की स्थापना।

  7. नये राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालयों की स्थापना।

  8. राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालयों का भवन निर्माण।

ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना हेतु होम्योपैथी विभाग की न्यूनतम आवश्यकता का आकलन:-

अत: उक्त को दृष्टिगत रखते हुये ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना काल (2007-12) के लिये होम्योपैथी विभाग की न्यूनतम आवश्यकताओं का आकलन निम्नवत् है-

  1. राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय की स्थापना-
    वर्तमान में प्रदेश में कुल 1483 राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय संचालित हैं जिसमें 89 शहरी तथा शेष ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत है। प्रदेश में 5000 या उससे अधिक आबादी वाले अधिकांश गाँवों में होम्योपैथिक चिकित्सालय/औषधालय उपलब्ध नहीं हैं। इसी प्रकार सभी तहसील विकास खण्ड, समुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर भी होम्योपैथिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है। प्रदेश के सीमित संसाधनों को दृष्टिगत रखते हुए उपर्युक्त समस्त स्थानों पर कदाचित होम्योपैथिक विधा के चिकित्सालय स्थापित किया जाना उपर्युक्त होगा। अत: ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान कुल 1000 राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय खोले जाने के साथ ही पूर्व में स्थापित 126 पदविहीन चिकित्सालयों में पदों के सृजन का प्रस्ताव है। इस हेतु चिकित्सक, फार्मासिस्ट तथा चतुर्थ श्रेणी के पदों का सृजन, औषधि, साज-सज्जा, फर्नीचर आदि की आवश्यकता है।

  2. राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय का भवन निर्माण-
    प्रदेश में स्वीकृत कुल 1515 राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालयों के सापेक्ष केवल लगभग 208 की संख्या में ही होम्योपैथिक चिकित्सालय अपने निजी भवनों में संचालित है। शेष चिकित्सालयों के अपने निजी भवन न होने के कारण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अत:ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में वित्तीय संसाधनों को दृष्टिगत रखते हुए 1200 राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालयों का भवन निर्माण कराये जाने का लक्ष्य है।

  3. होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों का निर्माण-
    वर्तमान में प्रदेश में 07 राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कालेज स्थापित हैं जिनमें सी0पी0एम0टी0 के माध्यम से बी0एच0एम0एस0 डिग्री पाठ्यक्रम हेतु प्रतिवर्ष 300 छात्र/छात्रायें प्रवेश पाते है। इन सभी कालेजों के लिए निर्धारित मानक के अनुसार स्टाफ एवं भवन की व्यवस्था अभी तक सुनिश्चित नहीं हो सकी है फलस्वरूप प्रथम चरण में राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के तीन राजकीय होमयोपैथिक मेडिकल कालेज लखनऊ, कानपुर तथा इलाहाबाद को केन्द्रीय होम्योपैथिक परिषद (सी0सी0एच0) द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानकों के अनुरूप सुसज्जित करने की प्रक्रिया के फलस्वरूप उक्त तीनों मेडिकल कालनेजों के भवन निर्माण का कार्य अपने अन्तिम चरण में है। इस क्रम में द्वितीय चरण के रूप में ग्यारहवी पंचवर्षीय योजना वर्ष 2007-12 में शेष 04 राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों के भवनों का निर्माण सी0सी0एच0 के मानक के अनुरूप कराये जाने का प्रस्ताव है।

  4. जिला होम्योपैथिक चिकित्‍साधिकारी कार्यालय की स्थापना/भवन निर्माण-
    प्रदेश में वर्तमान में 70 जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी के पद सृजित है, किन्तु उनके सहायतार्थ कोई स्टाफ स्वीकृत नहीं है। वे अकेले ही कार्यालय कार्य के अतिरिक्त क्षेत्र में स्थापित चिकित्सालयों का निरीक्षण/पर्यवेक्षण कार्य भी देख रहे है। इनके कार्यालय जनपद स्तर पर मुख्य चिकित्साधिकारियों के कार्यालयों में ही एक छोटे से कमरे में वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में स्थापित है जहां पर कार्यों को विधिवत् सम्पादित करने में अत्यन्त कठिनाई है। अत: ग्यारहवी पंचवर्षीय योजना में 70 जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी कार्यालय की स्थापना व भवन निर्माण का प्रस्ताव है। इस हेतु प्रत्येक के लिए 02 लिपिक वर्गीय तथा 02 चतुर्थ श्रेणी पदों के सृजन, साज-सज्जा, फर्नीचर व नये भवनों आदि का निर्माण कराये जाने की आवश्यकत है।

  5. मण्डल स्तर पर मण्डलीय संयुक्त निदेशक के 17 पदों का सृजन तथा उनके कार्यालय की स्थापना-
    प्रदेश में फील्ड में स्थापित चिकित्सालयों एवं जिला होमयोपैथिक चिकित्साधिकारियों की कार्य प्रणाली को सृदृढ़ करने हेतु मण्डल स्तर पर एक मण्डलीय संयुक्त निदेशक के पद सृजन एवं कार्यालय का प्रस्ताव है। इस प्रकार 17 मण्डलों हेतु प्रति मण्डल एक संयुक्त निदेशक, दो लिपिकीय स्टाफ एवं एक-एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पदों के सृजन, साज-सज्जा, फर्नीचर व कार्यालय भवन निर्माण हेतु ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में प्रस्ताव है।

  6. केन्द्रीय होम्योपैथिक परिषद, नई दिल्ली द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप होमयोपैथिक मेडिकल कालेजों में अति आवश्यक पदों का सृजन-
    प्रदेश में स्थापित/कार्यरत
    07 राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों में शिक्षण/शिक्षणेत्तर पदों/स्टाफ जो वर्तमान में उपलब्ध/सृजित है वे सी0सी0एच0 द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। केन्द्रीय होम्योपैथिक परिषद द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप पदों की भारी कमी के फलस्वरूप छात्रों की शिक्षा-दीक्षा की समस्त व्यवस्था में अवरोध/कठिनाई बनी हुई है। अत: निर्धारित मानकों के अनुरूप कम पड़ रहे अति आवश्यक पदों को सृजित किया जाना अति आवश्यक एवं अपरिहार्य है।

  7. नये होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों की स्थापना-
    उत्तर प्रदेश जैसे विशाल प्रदेश में जिसकी आबादी लगभग 18 करोड़ है के परिपेक्ष्य में वर्तमान में मात्र 07 स्नातक राजकीय होम्यापैथिक मेडिकल कालेज एवं निजी क्षेत्र में 01 मेडिकल कालेज ही स्थापित है। जबकि महाराष्ट्र जैसे छोटे प्रदेश में 46, मध्य प्रदेश में 21, गुजरात में 16, पश्चिम बंगाल में 13 इसी प्रकार अन्य प्रदेशों में इनकी संख्या बहुत अधिक है।
    उक्त होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग केवल 300 चिकित्सक ही उपलब्ध हो पाते है जो इतने बड़े प्रदेश की आवश्यकता को देखते हुए अत्यन्त कम है। परिणाम स्वरूप प्रदेश में डाक्टरों की कमी बनी हुई है। होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों की प्रतिवर्ष प्रवेश क्षमता केवल 300 होने के कारण ही अधिक फीस देकर भी उ0प्र0 के छात्र अन्य प्रदेशों में अनेकानेक कठिनाईयों के बावजूद शिक्षा लेने हेतु बाध्य है।
    अत: उपरोक्तानुसार वर्तमान आवश्यकता को दृष्ठिगत रखते हुए प्रदेश में कम से कम 10 नये होम्योपैथिक मेडिकल कालेज खोला जाना नितान्त आवश्यक है। तदनुसार ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में 10 होम्योपैथिक मेडिकल कालेज खोले जाने का लक्ष्य है।

  8. वर्तमान होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों का उन्नयन (उच्चीकरण)-
    प्रदेश में स्थापित 07 राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों में केवल स्नातक पाठ्यक्रम ही संचालित है। होम्योपैथिक के विकास एवं शिक्षा के स्तर में गुणात्मक वृद्धि को दृष्टिगत रखते हुए इन कालेजों में परास्नातक विशेषज्ञता पाठ्यक्रमों को संचालित किया जाना नितान्त आवश्यक है। अत: ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में उक्त सातों होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों में परास्नातक पाठ्यक्रम संचालित कराये जाने का लक्ष्य है।

  9. शोध सम्बन्धी कार्यक्रमों का संचालन-
    सभी चिकित्सा विज्ञान में अध्यावधिक जानकारियों को प्राप्त करने एवं विकास के लिए शोध संस्थानों की आवश्यकता होती हैं। होम्योपैथिक विभाग में भी भारत सरकार में एच0डी0आर0आई0 (होम्योपैथिक ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट) स्थापित/कार्यरत है जो विभिन्न औषधियों के चिकित्सकीय प्रभाव का अध्ययन करता है, परन्तु रोगों एवं उनके निदान के अध्ययन के लिए भारत सरकार में भी कोई संस्था नहीं है। उ0प्र0 में भी कोई संस्थान ऐसा नहीं है जहाँ पर रोगों, औषधि प्रभावों एवं औषधि दुष्प्रभावों का सम्यक अध्ययन किया जा सकें।
    प्रदेश में समय-समय पर भयावय रोगों जैसे-इनसिफलाइटिस, डेगू, घेघा, लैथारिएसीस आदि से भारी जनहानी/क्षति होती है। अन्य प्रदेशों में इस पर अध्ययन करके प्रभावी होम्योपैथिक औषधियों के माध्यम से नियंत्रण/इलाज कार्यक्रम चलाये जा रहे है। जबकि राज्य सरकार द्वारा इस दिशा में अभी तक कोई पहल नहीं की गयी है।
    अत: उक्त को दृष्टिगत रखते हुए होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों में शोध अनुसंधान शाखायें स्थापित करने एवं पृथक से एक शोध संस्थान स्थापित करने का ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में लक्ष्य है।

  10. होम्योपैथिक विश्वविद्यालय की स्थापना-
    वर्तमान में प्रदेश के 07 राजकीय होम्योपैथिक कालेज डा० भीम राव विश्व विद्यालय, आगरा से सम्बद्ध है परन्तु उक्त विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षाओं का संचालन व परीक्षाफल आदि की घोषणा समय से न हो पाने के कारण उक्त कालेजों के संचालन में विद्यार्थियों को अनेकानेक कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है।
    अत: आवश्यकता है कि जिस प्रकार उत्तर प्रदेश राज्य में समस्त एलोपैथिक मेडिकल कालेजों को किंग जार्ज मेडिकल यूनिवसीटी के अधीन एवं डेन्टल कालेजों का किंग जार्ज डेन्टल यूनिवसीटी के अधीन कर दिया है उसी प्रकार होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों हेतु पृथक से होम्योपैथिक विश्वविद्यालय स्थापित कर दिया जाये, ताकि होम्योपैथिक मेडिकल कालेजों की व्यवस्था सुचारू रूप से हो सकें।
    उक्त के परिपेक्ष्य में उ0प्र0 आयुर्वेद, यूनानी तथा होम्योपैथिक विकास सलाहकार समिति की डा0 आलोक पारिख की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई बैठक दिनांक 02.03.2006 जिसमें होम्योपैथिक विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु सुझाव दिया गया है।
    अत: ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में होम्योपैथिक विश्वविद्यालय खोले जाने का प्रस्ताव है।

  11. होम्योपैथिक औषधि निर्माणशाला तथा परीक्षणशाला की स्थापना-
    उ0प्र0 में 07 होम्योपैथिक मेडिकल कालेज, 1482 राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय, लगभग 2500 होम्योपैथिक पंजीकृत चिकित्सक, लगभग 25 औषधि निर्माण फार्मेसी तथा लगभग 5000 मेडिकल स्टोर है। इसी प्रकार आगामी वर्षों में प्रतिवर्ष लगभग 100 नये राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय खोले जाने का लक्ष्य है। इन स्थानों पर कार्य करने के लिए प्रशिक्षित फार्मेसिस्टों की आवश्यकता होती है किन्तु वर्तमान में उ0प्र0 में होम्योपैथिक फार्मेसिस्टों के प्रशिक्षण हेतु कोई संस्थान नहीं है। उ0प्र0 के समस्त राजकीय चिकित्सालयों/मेडिकल कालेजों को अपनी आवश्यकता के लिए औषधियों निजी क्षेत्र की इकाईयों से खरीदी जाती है। यदि सरकार की अपनी औषधि निर्माण शाला हो तो वहाँ पर फार्मेसिस्टों को प्रशिक्षण दिया जा सकता है और औषधियों की गुणवत्ता बनायें रखने के साथ ही कम मूल्य पर औषधियों प्राप्त की जा सकती है।
    अत: प्रदेश में ग्याहरवीं पंचवर्षीय योजनाकाल में कम से कम 05 फार्मेसी कालेज एवं औषधि निर्माण शाला स्थापित किये जाने का लक्ष्य है।

  12. वाहन की स्थापना-
    होम्योपैथी विभाग में केवल 01 वाहन निदेशक, होम्योपैथी के उपयोगार्थ हेतु ही उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त 07 चिकित्सा महाविद्यालय में प्राचार्यों/अधीक्षकों के उपयोगार्थ एवं जनपदों में जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारियों के उपयोगार्थ तथा मुख्यालय स्तर पर अन्य कोई वाहन उपलब्ध न होने के कारण अनेकानेक कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है।
    अत: मुख्यालय हेतु 05 चिकित्सा महाविद्यालयों के प्राचार्य/अधीक्षकों हेतु 07 वाहन तथा 70 जनपदों में प्रत्येक जनपद में जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारियों के उपयोगार्थ 70 कुल 82 + (07 एम्बुलेन्स कालेजों के चिकित्सालयों हेतु) वाहनों की नितान्त आवश्यकता हैं।

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